Thursday, 21 May 2020

यादे - अपनी बाते अपनों के साथ


|| कौन पूछता है पिजड़े में बंद पंछियों को याद तो उनकी आती है जो उड़ जाते है ||

मनुष्य का जीवन यादो का सागर है क्योकि इन्सान हमेशा यादो के साथ जीता रहता है | यादे उसकी संपत्ति है जिसे उससे कोई छिन नही सकता न कोई बाँट नही सकता है और जब कोई चीज उसके पास होती है तो वह उसका महत्व नही समझता है और जब वो चीज उससे कही दूर चली जाती है तो वो व्याकुल होने लगता है और उसे अपने पास होने की और उस के साथ बिताये पलो को महसूस करता है उसे अपने पास होने का एहसास करता है यही तो याद है | यादे पन्नो की तरह है जो हर नए पन्ने के पलटने से नए विचारो के साथ से मन के अन्दर प्रवेश करती है |

यादों का तो कहना कि जीने का अहसास है ये | जिसके जीवन के अन्तकरण में यादो का संग्रह नही है तो उस ने अपने जीवन को को कभी जिया ही नही बस उसने अपने जीवन को निराधार मानकर व्यतीत किया |

मित्रो यादे जीवन का गहना है जिसे हर कोई पहनता है और पहनना चाहता है क्योकि इसके बिना उसके जीवन का श्रृगार नही है |

यादे सिर्फ कहानियां नही एक अहसास है , बीते हुए पल की गवाह है | कल से सीखकर आने वाले कल की कल्पना है यादे |

एक छोटी सी बात एक छोटी सी याद के साथ...........

जब छोटे थे तब हर बात भूल जाया करते थे , तब दुनिया कहती थी कि “याद  करना सीखो” अब बड़े हुए तो हर बात याद रहती है तो दुनिया कहती है कि “भूलना सीखो”  “कैसी अजीब दुनिया है |”

श्रवण बघेल (अपनी बाते अपनों के साथ)


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