जिंदगी जीने की चाह है
डॉ. सरवन सिंह बघेल ‘श्रवण’ अनेक सामाजिक-राजनीतिक संगठनों से संबद्ध। राजनीतिक विश्लेषक के रूप में सतत शोध कार्य। Youtube पर Dr Sarvan Baghel नाम से मोटिवेशनल प्रोग्राम-चैनल। Life संस्था के संस्थापक सदस्य। शोध कार्य : गरीब कल्याण में दीनदयालजी द्वारा सृजित अंत्योदय और एकात्म मानववाद विचार की सामाजिक और राजनीतिक भूमिका, AUS। परास्नातक : राजनीति शास्त्र, AUS परास्नातकः वाणिज्य शास्त्र- व्यावसायिक अर्थशास्त्र, Dr.B.R.A.., आगरा। पुस्तकें : ‘भारतीय मनीषियों की प्रेरक भूमिका’, ‘भारत की सर्वांगीण उन्नति
Saturday, 26 March 2016
Wednesday, 6 January 2016
धरती पुत्र
मै धरती पुत्र हूँ
मै किसान हूँ
मै आज अपनों से ही बहुत त्रस्त हूँ,
मै भूखा हूँ मै नंगा हूँ, मै अनपढ़ हूँ, मै गरीब हूँ, क्योकि मै तेरा पुत्र हूँ,
मेरी आवाज में करुणा है,
मेरी देह में माटी की धूल है,
मै मेहनत दया की मूरत हूँ,
मै परोपकार की भावना मन में लिए कार्य करता हूँ,
मै दर्द सहता हूँ मै छाव की आस नही करता,
मै दर्द की चिंता नही करता, मुझे आराम नही काम चाहिए ,काम का सही दाम चाहिए।
घर मेरे बुढे माँ बाप अच्छी फसल होने का इन्तजार करते है कि उनकी अंधी आँखों का इलाज हो सके , मुझसे जुड़े हुए लोग फसल काटने पे अपने सपनों को पूरा करने का स्वप्न देखते है,
पत्नी और बच्चे खुशियों का इंतजार करते है मेरी बहन अपनी शादी के सपने देखती है हाय मेरी किस्मत एक दिन पर्यावरण असंतुलन के कारण सब ख़त्म हो जाता है और मै लाचार सब देखता रहता हूँ मेरा मन रोता है,
मगर मुझे अनेक परिवार की तश्वीर दिखाई देती है मै डर जाता हूँ मै अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने के लिए आत्महत्या जैसा आसान काम चुनने एक दुःसाहस करने का प्रयास करता हूँ
पर मै इतना कायर हूँ मै वो भी नही कर पाता, मै घर गिरवी रख माँ बाप का इलाज और खेत गिरवी रख बहन की शादी और इन लोकतृष्णायो से मुक्त होने के बाद मै धरती पुत्र अपनी धरती माँ की गोद में समां जाता हूँ।
हे ईश्वर मुझे क्षमा करना मै क्या करता ये समाज मुझ धरती पुत्र को अनपढ़ जाहिल और भिखारी कहता है।
मेरा दीआ हुआ खाता है मुझे ही दुतकारता है।
पर मुझे गर्व है मै धरती पुत्र हूँ, मै तेरा पुत्र हूँ ,फिर मेरे साथ अन्याय क्यों क्यों माँ क्यों,
मुझे जवाब चाहिए।
मै किसान हूँ
मै आज अपनों से ही बहुत त्रस्त हूँ,
मै भूखा हूँ मै नंगा हूँ, मै अनपढ़ हूँ, मै गरीब हूँ, क्योकि मै तेरा पुत्र हूँ,
मेरी आवाज में करुणा है,
मेरी देह में माटी की धूल है,
मै मेहनत दया की मूरत हूँ,
मै परोपकार की भावना मन में लिए कार्य करता हूँ,
मै दर्द सहता हूँ मै छाव की आस नही करता,
मै दर्द की चिंता नही करता, मुझे आराम नही काम चाहिए ,काम का सही दाम चाहिए।
घर मेरे बुढे माँ बाप अच्छी फसल होने का इन्तजार करते है कि उनकी अंधी आँखों का इलाज हो सके , मुझसे जुड़े हुए लोग फसल काटने पे अपने सपनों को पूरा करने का स्वप्न देखते है,
पत्नी और बच्चे खुशियों का इंतजार करते है मेरी बहन अपनी शादी के सपने देखती है हाय मेरी किस्मत एक दिन पर्यावरण असंतुलन के कारण सब ख़त्म हो जाता है और मै लाचार सब देखता रहता हूँ मेरा मन रोता है,
मगर मुझे अनेक परिवार की तश्वीर दिखाई देती है मै डर जाता हूँ मै अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने के लिए आत्महत्या जैसा आसान काम चुनने एक दुःसाहस करने का प्रयास करता हूँ
पर मै इतना कायर हूँ मै वो भी नही कर पाता, मै घर गिरवी रख माँ बाप का इलाज और खेत गिरवी रख बहन की शादी और इन लोकतृष्णायो से मुक्त होने के बाद मै धरती पुत्र अपनी धरती माँ की गोद में समां जाता हूँ।
हे ईश्वर मुझे क्षमा करना मै क्या करता ये समाज मुझ धरती पुत्र को अनपढ़ जाहिल और भिखारी कहता है।
मेरा दीआ हुआ खाता है मुझे ही दुतकारता है।
पर मुझे गर्व है मै धरती पुत्र हूँ, मै तेरा पुत्र हूँ ,फिर मेरे साथ अन्याय क्यों क्यों माँ क्यों,
मुझे जवाब चाहिए।
व्यंग राधा और कृष्ण
जिंदगी खामोश है तेरे दो लफ्ज़ सुनने के लिये,
कह दे उन शब्दों को ऐ मेरे महबूब जो राधा ने कृष्ण के लिए कहे कि मुझे नाज है अपने प्रेम पर,
जो खामोश है तेरी हर दगा पर, मगर तू छलिया, चोर ,निर्मोही है मेरे कृष्ण, मै अभागी हाय किस्मत की मारी तेरी राधा जिसे तेरा प्रेम तो मिला पर तू नही।
शायद इस समर्पण से अपने प्रेम की कहानी है हर जबां पर और तेरे लफ़्ज़ों पर सिर्फ मेरा ही तो नाम है तेरी मुरली की हर तान सिर्फ मेरा ही गान करती है,
मगर मेरे कान्हा मै तेरी याद में हर रोज तड़पती हूँ ,राधा नही अब मुझे मेरी सखिया पगली, बाबली कहती है,
मै तो तेरे लिए ये भी दर्द सहती हूँ और तुम सिर्फ इस बैरन मुरली के प्रेम में पागल हो जिसे तुम अपनी कमरिया और होठों से लगाये रहते हो।
राधा कृष्ण की प्रेम कहानी।l
कह दे उन शब्दों को ऐ मेरे महबूब जो राधा ने कृष्ण के लिए कहे कि मुझे नाज है अपने प्रेम पर,
जो खामोश है तेरी हर दगा पर, मगर तू छलिया, चोर ,निर्मोही है मेरे कृष्ण, मै अभागी हाय किस्मत की मारी तेरी राधा जिसे तेरा प्रेम तो मिला पर तू नही।
शायद इस समर्पण से अपने प्रेम की कहानी है हर जबां पर और तेरे लफ़्ज़ों पर सिर्फ मेरा ही तो नाम है तेरी मुरली की हर तान सिर्फ मेरा ही गान करती है,
मगर मेरे कान्हा मै तेरी याद में हर रोज तड़पती हूँ ,राधा नही अब मुझे मेरी सखिया पगली, बाबली कहती है,
मै तो तेरे लिए ये भी दर्द सहती हूँ और तुम सिर्फ इस बैरन मुरली के प्रेम में पागल हो जिसे तुम अपनी कमरिया और होठों से लगाये रहते हो।
राधा कृष्ण की प्रेम कहानी।l
मै बेटी हूँ।
मै बेटी हूँ
मेरी करुण पुकार सुनो
मुझे मत मारो
मुझे मत सताओ,
मै माँ हूँ
मै बहु हूँ
मै देवी हूँ
तुम मेरी हर रूप में पूजा करते हो
मै भी ईश्वर का अंश हूँ
फिर मेरी भूर्ण हत्या क्यों,
मेरे साथ दुराचार क्यों,
मेरा शोषण क्यों
क्योकि मै एक अबला हूँ।
मेरे लिए तुगलकी फरमान
उनके लिए मन के अरमान।
मेरे लिए रोक
उनके लिए शौक।
मेरे लिए इज़्ज़त
उनके लिए शान।
मेरे साथ इतना अन्याय क्यों
जवाब दो जवाब दो।
मै आने पर दुर्गा भी बन सकती हूँ
और अन्नपूर्णा भी,
झाँसी की रानी
और किरण बेदी भी,
मै साइना भी चित्रलेखा भी।
मेरी करुण पुकार सुनो
मुझे मत मारो
मुझे मत सताओ,
मै माँ हूँ
मै बहु हूँ
मै देवी हूँ
तुम मेरी हर रूप में पूजा करते हो
मै भी ईश्वर का अंश हूँ
फिर मेरी भूर्ण हत्या क्यों,
मेरे साथ दुराचार क्यों,
मेरा शोषण क्यों
क्योकि मै एक अबला हूँ।
मेरे लिए तुगलकी फरमान
उनके लिए मन के अरमान।
मेरे लिए रोक
उनके लिए शौक।
मेरे लिए इज़्ज़त
उनके लिए शान।
मेरे साथ इतना अन्याय क्यों
जवाब दो जवाब दो।
मै आने पर दुर्गा भी बन सकती हूँ
और अन्नपूर्णा भी,
झाँसी की रानी
और किरण बेदी भी,
मै साइना भी चित्रलेखा भी।
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