Wednesday, 6 January 2016

व्यंग राधा और कृष्ण

जिंदगी खामोश है तेरे दो लफ्ज़ सुनने के लिये,
कह दे उन शब्दों को ऐ मेरे महबूब जो राधा ने कृष्ण के लिए कहे कि मुझे नाज है अपने प्रेम पर,
जो खामोश है तेरी हर दगा पर, मगर तू छलिया, चोर ,निर्मोही है मेरे कृष्ण, मै अभागी हाय किस्मत की मारी तेरी राधा जिसे तेरा प्रेम तो मिला पर तू नही।
शायद इस समर्पण से अपने प्रेम की कहानी है हर जबां पर  और तेरे लफ़्ज़ों पर सिर्फ मेरा ही तो नाम है तेरी मुरली की हर तान सिर्फ मेरा ही गान करती है,
मगर मेरे कान्हा मै तेरी याद में हर रोज तड़पती हूँ ,राधा नही अब मुझे मेरी सखिया पगली, बाबली कहती है,
मै तो तेरे लिए ये भी दर्द सहती हूँ और तुम सिर्फ इस बैरन मुरली के प्रेम में पागल हो जिसे तुम अपनी कमरिया और होठों से लगाये रहते हो।
राधा कृष्ण की प्रेम कहानी।l

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