उड़ान बाकी है....
खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,
जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है,
लहरों की ख़ामोशी को समुन्द्र की बेबसी मत समझ ऐ दोस्त,
जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफान बाकी हैं।।
-डॉ श्रवण बघेल
“गुरु भाई”
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