Wednesday, 2 June 2021

इक रास्ता होना चाहता हूँ....

 

इक रास्ता होना चाहता हूँ....

बिना सफ़र बिना लक्ष्य का इक रास्ता होना चाहता हूँ,

कहीं दूर किसी जंगल में, ठहरा दरिया होना चाहता हूँ,

बिना रिश्तों और रिवाजों की, एक जिंदगी होना चाहता हूँ,

दूर पहाड़ों में गिरते झरने में कहीं खोना चाहता हूँ,

मैं आज “मैं” होना चाहता हूँ।। 

                             -डॉ श्रवण बघेल “गुरु भाई”

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