नेताओं की कहानी....
आओ आज सुनाऊँ आपको हम राजनेताओं की कहानी,
अपनी जुबानी, कुछ सुनी कुछ अनुसुनी सी कहानी,
हम नेता हैं जी सिर्फ नेतृत्व करना
जानते हैं,
न मंदिर को जानते है, न मस्जिद को जानते हैं,
हम इंसान हैं इंसानियत को पहचानते हैं,
हम भूखे पेट को रोटी और जरूरतमंद की जरुरत को जानते हैं|
तप–त्याग–स्नेह
से सदैव करते हम अपना काम हैं,
थकान, भूख-प्यास नही कर सकते हमें परेशान हैं,
जनता की सेवा करना ही कर्म और हमारा ईमान हैं,
एक छोटा सा शब्द “नेताजी” हमारी क्षमताएं बढ़ा देता हैं,
वही हमें कभी नेता और कभी अभिनेता बना देता हैं,
हम सभी के साथ रोते और हंसते हैं, हर खुशी और गम में सबके साथ सदैव होते हैं|
बनते है सहारा बे-सहारो के लिये, बनते है किनारा बे-किनारो के लिये हम,
जो हम जीये अपने लिये तो क्या ही जीये, हम जीते है हज़ारो के लिये|
सियासत की रंगत में हम ना डूबा करते है,
देश समाज के लिए हम दिन-रात जुटा करते है,
हम अपने वायदे जुबान को जरुर पूरा किया करते है,
गर तुम्हे अपनी जुबां दी हमने तो कभी न पीछे हटा करते हैं|
क्या खोया, क्या पाया मैंने, मिलते और बिछुड़ते इस मग में,
मुझे किसी से न शिकायत, बस मैं यूँही चलता रहूँ पग पग अपने मग में|
-डॉ
श्रवण बघेल
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