Wednesday, 2 June 2021

ज़िन्दगी के सफ़र में....

 

ज़िन्दगी के सफ़र में....

ये दुनिया इतनी भी बेदर्द नही,

तुम किसी अपरिचित से बात करके तो देख,

अपने दंभ से आगे बढ़कर तो देख,

किसी अपने या पराएँ को प्यारी सी मुस्कान देकर तो देख।

किसी रूठे को मनाकर तो देख,

रोते हुए आये थे हम मगर रोते हुए जाएंगे ऐसा जरूरी भी तो नही,

क्योंकि ये दुनिया इतनी भी ख़राब नही है,

कुछ अपने पुराने सपनो को हिलाकर तो देखो,

अचानक अपनों को याद करके तो देखो,

कुछ पुराने घावों को साफ करके तो देखो,

स्वयं को और दूसरों को माफ करके तो देखों।

रास्ते चाहे अलग ही क्यों न हो सबके 

मगर दिल से दूरी न हो,

मतभेद हो परन्तु ,मनभेद न हों,

सच मित्रों ये दुनिया इतनी भी ख़राब नही है,

किसी दिन मित्रता का हाथ बढ़ाकर तो देखो,

अपनो को प्रेम जता कर देखो,

बिना किसी वजह के खुशियां मनाकर तो देखो,

होठो से गीत गुनगुनाकर तो देखो,

हमारी हर एक सांस में जिंदगी है 

यह कोई मजबूरी नही है,

दोस्तों दुनिया इतनी भी ख़राब नही है,

ज़िन्दगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मकाम
वो फिर नहीं आते, ज़िन्दगी के सफ़र में...

बस यही है मेरी जिंदगी में आज तक सीखी गयी सीख।।

                             -डॉ श्रवण बघेल “गुरु भाई”

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