समय बदलना सीखों....
बदल जाओं समय के साथ, या फिर समय बदलना सीखों,
मजबूरियों को मत कोसो, हर हाल में चलना सीखों।
इच्छाएँ कुछ और हैं, समय की इल्तजा कुछ और हैं,
कौन जी सका हैं, जिंदगी अपने तरीके से, दिल चाहता कुछ और है , होता कुछ और
हैं।
मेरी फितरत में नही अपना दर्द बयां करना; अगर तेरे वजूद का हिस्सा हूँ तो महसूस
कर दर्द मेरा!
जिंदगी जीने का हुनर अपना-अपना हैं,
कैदी ही तो है सब यहाँ, कोई ख्बाव के तो कोई ख्बाहिशों के।।
-डॉ
श्रवण बघेल “गुरु भाई”
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