आवाज़ें दांस्ता....
आज आवाजें दांस्ता मैं आपको सुनाता हूँ,
मौन रहकर भी कानों में चुपके से कुछ कह जाता हूँ,
महसूस कर सकते हैं आप मुझे मन से क्योकि,
मौन रहकर भी मैं आपके मन में गूंज जाता हूँ।
सुनों कभी गौर सें तो मेरी खामोशियाँ भी बोलती है,
कभी सुख-दुःख की चर्चा, तो कभी इश्क-मोहब्बत के किस्से है,
कभी आवाज में मेरी खुशियों का उफान है,
तो कभी ग़म की गहराईयां और तन्हाई का धीरा सा तूफ़ान हैं,
कभी ऊँचाई पाने की ख़ामोशी तो कभी लक्ष्य पाने का आगाज हैं,
इस ख़ामोशी और शोरगुल के मेलजोल में
सबकी ऊंची आवाज़ है, सबसे ऊँची आवाज़ हैं।।
-डॉ
श्रवण बघेल
No comments:
Post a Comment