जिंदगी का कारवां....
जिंदगी का कारवां कभी थम न जाएँ,
प्रेम कुछ इस तरह करना जिसकी मिसाल बन जाएँ।
मैं चुप हो जाऊं तो तुम कहते रहना,
जीवन के इस पहलू में मेरा संबल बनकर रहते रहना,
ख़त्म कभी न हो पाएं चाहत का दरिया,
तुम शीतल जल बनकर बहते रहना,
मैं चुप हो जाऊं तो तुम कहते रहना।
संग संग न रहकर भी हम पास है,
बस इतना ही कहते रहना,
हम बुनियाद नहीं बन पाएँ, एक साथ नही रह पाएँ,
यादों में धड़कन बन साथ मेरे चलते रहना,
मैं चुप हो जाऊं तो तुम कहते रहना।
मैं दरिया सी प्यासी, तुम सागर की लहरें बन मुझमें मिलते रहना।
मेरे भोले भाले ख्वाबों में तुम मुझको मेरे बन गहते रहना,
मेरे जीवन के हर पहलू में सुगंध बनकर बिखरे रहना।
मैं चुप हो जाऊं तो तुम कहते रहना।
डॉ श्रवण
बघेल “गुरु भाई”
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