अहिस्ता चल जिंदगी....
अहिस्ता चल जिन्दगी
अभी कई कर्ज चुकाना
बाकी हैं,
कुछ दर्द मिटाना बाकी
हैं,
कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी
हैं।
रफ़्तार में तेरे चलने
से,
कुछ रूठ गए, कुछ छुठ
गए,
रूठों को मानना बाकी
हैं
रोतो को हँसाना बाकी
हैं।
कुछ रिश्ते बन कर टूट
गए
कुछ जुड़ते जुड़ते छूठ
गए,
उन टूटे छुठे रिश्तों
के
जख्मों को मिटाना
बाकी हैं।
तू आगे चल मैं आता
हूँ,
क्या छोड़ तुझे जी
पाऊंगा,
इन सांसों पर हक हैं
जिनका,
उनको समझाना बाकी
हैं।
अहिस्ता चल जिन्दगी,
अभी कुछ कर्ज चुकाना
बाकी हैं।।
-डॉ
श्रवण बघेल “गुरु भाई”
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