Saturday, 5 June 2021

मकान को घर बनाकर तो देखों....

 

मकान को घर बनाकर तो देखों....

यूँ न समय को खामखा गंवाओ तुम,    
न किसी गरीब को यूहीं सताओ तुम,

मरने के बाद मईयत पर पहुँचते है सारे लोग

जब किसी जिन्दा को जानों तो बात बने। 

जितना किसी को गिराने में दिखाते हो जोर यारों

जब किसी के जीवन को बनाओ तो बात बने।   

जब रातभर जला ये मिट्टी का दिया दूसरो के वास्ते,

दोस्तों बनके दीया बनो किसी के जीवन का तो बात बने।   

गरीबी अमीरी मायने नही रिश्तों में यारों,

खुल कर दोस्ती निभाओं तो बात बने। 

सब कुछ मतलब से नही होता यारों,

कभी बिना मतलब के भी मिलों यारों तो बात बने। 

जरुरत पर तो हर कोई बात करता है,

बिना जरुरत के बात करो तो बात बने यारों। 

अपने दिल का सूरते-हाल तो सभी बयां करते हैं,

कभी हाले दिल हमारा जानो तो बात बने।              
जिन्दगी का सफ़र कटता नही कभी तन्हा यारों,

कभी कोई भरोसा का साथी बनाओ तो बात बने। 

पत्थर और गारे से सिर्फ मकान बनते देखे है हमने,

तुम उस मकान को घर बनाकर तो देखों। 

इस जहां की तन्हाईयों में हमे आजमां कर तो देखों,

कभी आप हमसे दोस्ती निभाकर तो देखों।। 
                                         -डॉ श्रवण बघेल

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