नेतृत्व....
नेतृत्व, समाज को दिशा दिया करता हैं,
संकट आने पर वह साथ दिया करता हैं,
वह कभी नही झोंकता लोगों को तूफानों में,
खतरे आने आने पर वह स्वयं खेला करता हैं।
नेतृत्व होता है योग्य अपने, समाज को सही दिशा में ले जाने में,
अगर हुई थोड़ी भी चूक तो वह न गिरा करता हैं,
होकर तैयार सीना तान वही मुसीबतों से लड़ा करता हैं,
पहचान वक्त की नब्ज वह सूझबूझ से लेता काम,
सही निर्णय ले वह सफलता से कर देता है जनता के काम।
‘बढे चलो’ का नारा देकर, नेतृत्व कभी न रहता पीछे,
नेतृत्व सदा आगे बढ़कर मार्ग हमें दिखलाता हैं,
पीछे रहकर वह कभी न करता अपने लिए आराम हैं,
गोली खा सीने पर वह बचाता सबका आत्मसम्मान हैं,
डरता नही वह कभी मुश्किल वक्त से हिम्मत से लाड़ लड़ाता हैं,
निरंतर चलकर सबको मंजिल तक वह पहुंचता हैं।
केवल कुछ लोगों का हित जो सोंचे वो नेतृत्व नही बन सकता जन जन का,
नेतृत्व वही बन सकता जो दिशा दान कर सके सबका,
नेतृत्व न करता भेदभाव कभी, एकभाव के साथ करता बर्ताव सही,
नेतृत्व न देता भाव कभी लच्छेदारी बातों को,
जिंदगी लगा देता वह निज आन-बान-शान के लिए।
पिछलग्गू पैदा कर लेना नेतृत्व नहीं,
नेतृत्व नहीं हू-हू कर पत्थर फिकवाता,
नेतृत्व देश के दीवाने पैदा करता,
भगत सिंह और श्री गुरूजी जैसे परवाने पैदा करता हैं,
बोस और पटेल जैसे शेरे हिन्द जैसा जज्बा पैदा करता हैं,
लाठी, डंडो और गोली से न डरता वह तो हिम्मत वाले काम जनता के लिए कर जाता हैं।
नेतृत्व देखता देश, देश की खुशहाली,
नेतृत्व नहीं देखता स्वयं को, अपनों को,
नेतृत्व, हमेशा खुदी मिटा कर चलता है,
पालता नहीं आँखों में सुख के सपनों को।।
-डॉ श्रवण बघेल
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