Wednesday, 2 June 2021

चट्टान सी मुसीबतें....

 

चट्टान सी मुसीबतें....

चट्टान सी खड़ी रही मुसीबतें, मैं सागर की लहरे बन टकराता रहा,

कठोर सागर की छाती धकेल देती वापस मुझे, बटोर हिम्मत मैं बार-बार आता रहा।

धूल धुल गयी जब सच के आईने से, मेरी कोशिशों का असर रंग दिखाता रहा,

टूट रहा था वो पत्थर भी धीरे-धीरे, साध निशाना मैं बार हर बार बरसाता रहा।

बिखर रहा था वो इस चोट से जर्रा जर्रा, देख साहिल मैं उस पार रास्ता बनाता रहा,

कट गया पत्थर मेरी रुकावटों का , धुन उमंग के गीतों को मैं गाता रहा।

चट्टान सी खड़ी रही मुसीबतें, मैं सागर की लहरे बन टकराता रहा।।

                             -डॉ श्रवण बघेल “गुरु भाई”

No comments:

Post a Comment