टूटी चप्पल की कहानी....
आओं सुनाऊ टूटी चप्पल की कहानी,
अपनी जुबानी, उनकी जुबानी, बड़े सघर्षों की है इसकी कहानी,
संघर्षो के पथ पर इसने मुझे चलना सिखाया,
अंगारों से न इसने डरना सिखाया,
झेल गयी ये खुद मेरे पावों में उठे दर्द को,
खुद रहबर बनकर मुझे उठाना सिखाया,
खुद को कुरबां कर दिया मेरी मंजिल की खातिर,
उफ्फ्फ... सी भी न की जब मोची ने सुआ घुसाया।
टूटी हुई इस चप्पल ने मेरी सफलता तक अपना साथ बिना मोलभाव के यूहीं निभाया।
-डॉ श्रवण बघेल
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