Wednesday, 2 June 2021

न रुकना है....

 

न रुकना है....

न बोलूँगा, न देखूंगा, दुनिया से नाता तोडूंगा,

न रुकना है, न थकना है, सपने पूरे कर छोडूंगा,

मैं जान फूंक दूंगा अब तो अपना रास्ता न मोडूँगा,

सपने पूरे कर छोडूंगा- सपने पूरे कर छोडूंगा।

टकराना है चट्टानों से भिड़ना है जा मैदानों में,

जुड़ना है धरती से मुझे उड़ना है आसमानों में,

रोक सके जज्बात मेरे अब दम कहाँ है तुफानो में,

देर लगे चाहे मुझको राहों से मुख न मोडूँगा,

सपने पूरे कर छोडूंगा- सपने पूरे कर छोडूंगा।

है सब्र का फल मीठा लेकिन है सब्र कहाँ इंसानों में,

हो लक्ष्य न जिसका जीवन में रहता है यो शमशानों में,

मेरा दर्द क्या जानेगा कोई , है कई राज छुपे मुस्कानों में,

टकराऊँगा हर दीवार से मैं पर हाथ कभी न जोडूंगा,

सपने पूरे कर छोडूंगा- सपने पूरे कर छोडूंगा।

जब तक पूरे हो न जाएँ, चैन कहाँ अरमानों में,

लगे न फल जब पेड़ों में, जाता है कौन बागानों में,

मन ने जब ठान लिया रोकेगा कौन दीवानों को,

रच के मैं इतिहास नया, एक पन्ना नया जोडूंगा,  

सपने पूरे कर छोडूंगा- सपने पूरे कर छोडूंगा।।

                             -डॉ श्रवण बघेल “गुरु भाई”

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