सुन समन्दर....
सुन समन्दर मैं तेरी तरफ आता हूँ,
भागीरथ की गंगा को फिर तुझमें मिलाता हूँ,
नही डर लगता मुझे अब तेरी गहराई से,
सच पूंछ मैं तुझसे नजर से नजर मिलाने आया हूँ।
मैंने तेरी नदी से थोडा सा पानी क्या लिया?
तूने तो मुझ पर सितम ही ढा दिया,
तुझे गुरुर है तू बहुत बलशाली हैं,
मैं चिड़ियाँ बन तेरा गुरुर लेने आया हूँ,
तुझे लगता है ये छोटी चिड़िया क्या तुझे मिटाएगी?
छोटी-छोटी अपनी चोच में ये बार बार रेत भर लाएगी,
मिटा देगी ये अपनी हस्ती तेरा गुरुर मिटाने में,
मत टकरा बेवजह इसका घोंसला तू मिटाने में।
तोड़ दे तू अब अपनी भ्रम की ये दीवारे,
रख हौंसला की वो मंज़र भी अब आएगा।
ओSSS समन्दर तू खुद एक दिन मेरे पास आएगा।।
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