Wednesday, 2 June 2021

कल, आज और कल....

 

कल, आज और कल....

बीतें पल की बात करें क्या? वो लौट कर नही आने वाला,

आज खड़ा जो सम्मुख अपने, वह भी है जाने वाला।

बात करे चलो उस कल की जो कल ही कल आ जायेगा,जीवन में फिर आशाओं के दीप जलाकर जायेगा। 

अतीत बने जो पल तीखे थे, गीत न वह गाने वाला,

आज खड़ा जो सम्मुख अपने, वह भी है जाने वाला।

बात पुरातन बीत गयी जो, क्यों हम वह गाना गाएँ, नए उत्साह से काम भला कर, आओ जग पर छा जाएँ।

बुरे काम का बुरा नतीजा, सदियों जग देता ताना, आज खड़ा जो सम्मुख अपने, वह भी है जाने वाला।

कुछ अच्छे कुछ बुरे पलों को वर्ष पुरातन दिखा गया,

जाते जाते न जाने यह, क्या कुछ हमको सीखा गया।

आना जाना रीत यही है, पल यहीं अमृत विष प्याला,

आज खड़ा जो सम्मुख अपने, वह भी है जाने वाला।।

                             -डॉ श्रवण बघेल “गुरु भाई”

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