Saturday, 5 June 2021

खुद को खुदा में मिलाकर....

 

खुद को खुदा में मिलाकर....

खुद को खुदा में मिलाकर तो देखों,

खुद को उसमें समाकर तो देखों,

हाथों में सबके हाथ मिलाकर तो देखों,  

खुद से निगाहें मिलाकर तो देखों,

खुद को दूसरों के वास्ते मिटाकर तो देखों,

जिंदगी से सहारे हटाकर तो देखों,

अपनी जिम्मेदारियाँ निभाकर तो देखों,

अपनों को गले लगाकर तो देखों,

सब पर प्यार लुटाकर तो देखों। 

नामुमकिन को मुमकिन बनाकर तो देखों,

समुन्द्र को कुंजे में लाकर तो देखों,

वास्तव से वास्तव में नजर मिलाकर तो देखो,

आसमां को जमीं पर लाकर तो देखों। 

रूठें हुए को मनाकर तो देखों,

रोते हुए को हँसा तो देखों,

दिल से दूरियां हटाकर तो देखों,

आँखों से आंसू बहाकर तो देखों,

हरीतिमा की आभा से युक्त होगा मन का मरू भी,

प्रेम की पवित्र गंगा बहाकर तो देखों। 

भूखे को रोटी, प्यासे को पानी पिलाकर तो देखों। 

स्वयं से स्वयं को मिलाकर तो देखों,

झूट को सच से दबाकर तो देखों,

कायरता को साहस से हराकर तो देखों,

जिन्दगी को सकारत्मक बनाकर तो देखों,

नकारत्मक चिंतन को खुद से हराकर तो देखों,  

जब आभास हो तुम्हे मैं नाराज हूँ,

फिर भी मुझे हक़ से आप बुलाकर तो देखो,

पहुँचूँगा तेज हवाओ के झोंकें की तरह,

भीति में वीथि बनाकर तो देखों।   

क्षणभर में आसान होती है मुश्किलें,

खुद को खुदा का बनाकर तो देखों,

धरा पर खींचों हल से लकीरें

माटी से सोना उगाकर तो देखों,

पी जाओं जहर का प्याला मीरा बनकर,

जहर को भी अमृत बनाकर तो देखों। 

कृष्ण की भक्ति में खुद मिटाकर तो देखों।।    

 

                                        -डॉ श्रवण बघेल

 

मकान को घर बनाकर तो देखों....

 

मकान को घर बनाकर तो देखों....

यूँ न समय को खामखा गंवाओ तुम,    
न किसी गरीब को यूहीं सताओ तुम,

मरने के बाद मईयत पर पहुँचते है सारे लोग

जब किसी जिन्दा को जानों तो बात बने। 

जितना किसी को गिराने में दिखाते हो जोर यारों

जब किसी के जीवन को बनाओ तो बात बने।   

जब रातभर जला ये मिट्टी का दिया दूसरो के वास्ते,

दोस्तों बनके दीया बनो किसी के जीवन का तो बात बने।   

गरीबी अमीरी मायने नही रिश्तों में यारों,

खुल कर दोस्ती निभाओं तो बात बने। 

सब कुछ मतलब से नही होता यारों,

कभी बिना मतलब के भी मिलों यारों तो बात बने। 

जरुरत पर तो हर कोई बात करता है,

बिना जरुरत के बात करो तो बात बने यारों। 

अपने दिल का सूरते-हाल तो सभी बयां करते हैं,

कभी हाले दिल हमारा जानो तो बात बने।              
जिन्दगी का सफ़र कटता नही कभी तन्हा यारों,

कभी कोई भरोसा का साथी बनाओ तो बात बने। 

पत्थर और गारे से सिर्फ मकान बनते देखे है हमने,

तुम उस मकान को घर बनाकर तो देखों। 

इस जहां की तन्हाईयों में हमे आजमां कर तो देखों,

कभी आप हमसे दोस्ती निभाकर तो देखों।। 
                                         -डॉ श्रवण बघेल

Friday, 4 June 2021

साजिश और शिकार....

 

साजिश और शिकार....

हम तो साजिशों के शिकार हो गए यारों।
न था कोई कुसूर मेरा, खामखा हम यूहीं गुनहेगार हो गए यारों,

कर दी थी फ़ना हमने यूँही सभी हसरतें अपनी,

मगर फिर भी अपनों की नज़रों में बेकार हो गए,

गैरों का सहारा लेने की हसरतें न थी अपनी,

अपने तो यूँही बेगरज हो गए,

दूसरे उन्हें अपने लगने लगे,

हम तो उनकी आँखों में अंगारा हो गए|

अपनों से दूर होकर देखा हमने दुनिया का ये तमाशे मंजर,

हर जगह मुझे नजर आया एक अपने जैसा समन्दर,

गहराई और खुद्दारी को साथ लिए,

अब हम भी भटक रहे है द्वारे द्वारे,

हर कोई दिखाता है अब हमें आईना,

मगर अब हम बद्सुरते बेहाल हो गए,

नही छोड़ी हैं हमने उम्मीद दामन की,

क्योकि सपने अब हमारे चश्मे बद्दूर हो गए,
देखा अब हमने रिश्ते नही बनते आसानी से,
बनते है अब रिश्ते आपकी हैसियत के हिसाब से,

कुछ लोग अब दौलत के यार हो गए|

किसी को समझ ना आती अब नेकियां हमारी,

कुछ लोग अब छल कपट के सरदार हो गए|

यारों, खुश है हम सहकर आफतों का ये दौर,

इन सब में न जाने अब कितने चहरे नमूदार हो गए।  

खुशामद न करेंगे अब किसी की,
वो तो गवा के ज़मीर अपना, खुद्दार हो गए।।  

संघर्ष के पथ....

 

संघर्ष के पथ....

होना है अगर मशहूर इस जहां में,

तो संघर्ष के पथ पर अब चलना होगा,

लक्ष्य को पाने की खातिर

इस ख्याली दुनिया से निकलना होगा,

संघर्ष के पथ पर अब चलना होगा|

इतिहास बदलता नही कभी,

लम्बे लुभाबनें भाषणों से,

इतिहास बदलता है सिर्फ

मेहनत और त्याग के सत्कारों से,  

साथ ही लड़ना पड़ता है अत्याचारों से,

जब दर्द से भरी ये रातें होगी,

संघर्षो से भरी बातें होगी,

चन्द्रमा की रौशनी में सफलता की राहे होगी|

जैसे पतझड़ बिना वृक्षों पर नवीन कोपल आते नही,

दुःख और संघर्ष सहे बिना, सफलता के दिन आते नही|

होना है अगर मशहूर इस जहां में,

तो संघर्ष के पथ पर अब चलना होगा,

दुनिया को प्रकाशित करने की खातिर,

सूरज की तरह अब जलना होगा,

रात को दिन में बदलने की खातिर,

हवा की तरह अब निरंतर चलना होगा||

                                         -डॉ श्रवण बघेल

आवाज़ें दांस्ता....

 

आवाज़ें दांस्ता....

आज आवाजें दांस्ता मैं आपको सुनाता हूँ,

मौन रहकर भी कानों में चुपके से कुछ कह जाता हूँ,

महसूस कर सकते हैं आप मुझे मन से क्योकि,

मौन रहकर भी मैं आपके मन में गूंज जाता हूँ।

सुनों कभी गौर सें तो मेरी खामोशियाँ भी बोलती है,

कभी सुख-दुःख की चर्चा, तो कभी इश्क-मोहब्बत के किस्से है,

कभी आवाज में मेरी खुशियों का उफान है,

तो कभी ग़म की गहराईयां और तन्हाई का धीरा सा तूफ़ान हैं,  

कभी ऊँचाई पाने की ख़ामोशी तो कभी लक्ष्य पाने का आगाज हैं,

इस ख़ामोशी और शोरगुल के मेलजोल में      सबकी ऊंची आवाज़ है, सबसे ऊँची आवाज़ हैं।।

                                          -डॉ श्रवण बघेल

Thursday, 3 June 2021

सांसों पर समझौता....

 

सांसों पर समझौता....

जिन्दगी मिली है एक बार हमकों

तो हर सांस से अब समझौता किसलिए,

यह गहरी रात का अँधेरा हैं,

आने वाला कल फिर एक नया सबेरा हैं,

न थंका हूँ अभी मैं न मुझे अभी थकना हैं,

अभी मंजिल की ओर चल रहा हूँ,

मगर मुश्किलों की रात का काला अँधेरा हैं,    

अभी बैठा हूँ मै मंजिल की राह में,

आनेवाले कल का मुझे बेरा हैं,

रहजनों से तो भाग निकला था,

अब मुझे रहबरों ने आकर घेरा हैं,  

आगे आगे बढ़ो तबर वालों,

अभी यह वन बहुत घनेरा हैं,

अब जिंदगी का काफिला किसकी पैरवी में चले,

इसी बात का ना हमें बेरा हैं,

मेरी साँसों का ना जाने कौन लुटेरा हैं,  

जिन्दगी मिली है एक बार सबको

तो हर सांस से अब समझौता किसलिए?        
                                         -डॉ श्रवण बघेल

 

यालगार भरेंगे हम....

यालगार भरेंगे हम, हक़दार बनेगे हम,

खुद की कमजोरियों से खुद लड़ेगे हम,

संगठित बनेगे हम, शीलयुक्त बनेगे हम,

शिक्षित बनेगे हम, प्रशिक्षित बनेगे हम,

अपने हिस्सों के हकदार बनेगे हम।      

उठकर, लड़कर, पढ़कर और बढ़कर,

अपनें सपनों के हकदार बनेगे हम।       

न किसी से डरेंगे हम, न अब कुछ कर गुजरने के लिए पीछे हटेंगे हम,

अब यालगार भरेगे हम।         

न परिस्तिथियों से डरेंगे हम, न किस्मत से भिड़ेंगे हम,

तूफ़ान मचाएंगे हम, गर्दा उड़ायेंगे हम,

अपने सपनों को पूरे कर जायेंगे हम।     

खुद के मुकद्दर और कर्मो से, खुद को राजा बनायेगे हम,

अपने इस हक़ के लिए दुनिया से लड़ जायेंगे हम, अपने सपने पूरे कर जायेंगे।   

जब समय अपना आएगा तो सबसे बड़ा और लम्बा छलांग लगायेंगे हम।।          

                                           -डॉ श्रवण बघेल